"आत्महत्या रोकने के लिए नैतिक समर्थन और सहानुभूति:"
आप सोच रहे होंगे ये दिल के रिश्तों की बात करने वाले ब्लॉग के बीच में आत्महत्या की बात कहाँ से आ गई, तो मैं आप को बता दूँ दिल के रिश्तों में इतनी ताकत होती है की वो दुनियां की हर समस्या का समाधान निकाल सकती है।
चलिए आप को कुछ जानकारी देती हूँ।
भारत में हाल ही में आत्महत्या पर एक सर्वेक्षण के अनुसार, आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, हर साल हजारों लोग विभिन्न कारणों से आत्महत्या कर रहे हैं। आर्थिक तंगी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक विवाद, और शैक्षणिक दबाव प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि आत्महत्या करने वालों में युवा और वयस्क दोनों शामिल हैं, लेकिन युवाओं की संख्या अधिक है। मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता और नैतिक समर्थन की कमी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और सामाजिक समर्थन को मजबूत करना आवश्यक है।
यह सर्वेक्षण हमारे समाज को इस गंभीर मुद्दे के प्रति जागरूक करने और इसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
अपनों को आत्महत्या करने से कैसे रोकें ?
- इसे पढ़ें।
- “आत्महत्या रोकने के लिए नैतिक समर्थन और सहानुभूति:”
चलिए मैं आपको एक सत्य घटना सुनाती हूँ। और एक बार याद दिला दूँ “आत्महत्या रोकने के लिए नैतिक समर्थन और सहानुभूति:”
हमारे फ्लैट के पास वाले कुछ लोग भाड़े पर रहने आए थे, हम खुश थे की चलो कोई पास में रहने आ गया है अब हमें भी अच्छा लगेगा। मेरे दो बच्चे हैं, मेरे पति के ऑफिस जाने के बाद बड़ा बेटा स्कूल चला जाता और छोटे वाले को लेकर मैं घर पर ही रहती थी।
जैसा की मैंने आपको बताया कुछ लोग रहने आये थे पड़ोस में , एक हफ़्ते तक हमें उनका चेहरा भी देखने को नहीं मिला। मैंने फ्लैट के ओनर से कपम्प्लेन किया इसके बारे में कि आपने कैसे लोगों को रेंट पर रखा है जो घर में ही छुपे रहते हैं, कहीं कुछ ग़लत तो नहीं ?
हमारे कहने पर एक दिन वो आये और उन्होंने बिल्डिंग के अन्य लोगों के साथ उनकी पहचान करवाई। वो पति पत्नी दो लोग ही रहने आए थे। मुझे लोगों से मिल कर रहना और बातें करना अच्छा लगता है इसलिए कुछ ही दिनों में महिला से मेरी अच्छी खासी दोस्ती हो गई। मेरे बच्चों को वो बहुत प्यार करती थी वो जो मांगते वो बना कर खिलाती थी।
वो कभी भी अपने पति के बारे में बात नहीं करती और ना ही उसके घर में कोई तस्वीर ही थी उसके पति के साथ। मुझे शक़ तो होता पर किसी के निजी जीवन में दखल देना मैंने ठीक नहीं समझा इसलिए मैंने कभी भी इस बारे में उससे कुछ पूछा ही नहीं।
वो कभी एक घंटे के लिए घर आता कभी दो घंटे के लिए और कभी कभी महीनों तक उसका कुछ पता ही न चलता । मुझे आश्चर्य तो तब हुआ जब मैंने पूछा तुम्हारा पति कहाँ काम करता है और उसके जवाब में उसने कहा मुझे नहीं पता।
पहले तो सब ठीक ही चल रहा था पर कुछ दिनों बाद वो जब भी घर आता तो उसके जाने के बाद वो हमेशा अपने चेहरे पर बने चोट के निशान को छुपाने की कोशिश करती। वो आहिस्ता आहिस्ता डिप्रेशन में जा रही थी जो मुझे साफ साफ दिख रहा था।
मैं अब ज्यादातर उसे अपने साथ ही रखती, मेरे बच्चों के साथ वो हस्ती खेलती, मैं जब भी कहीं बाहर जाती उसे अपने साथ ले जाया करती। उसकी निजी ज़िन्दगी और ख़राब होती गई। तीन महीनें हो चुके थे उसका पति घर नही आया था और उसने उसको रेंट और उसके खर्च के लिए पैसे देना भी बंद कर दिया।
एक दिन अचानक दोपहर में कुछ लोग उसका घर खाली कर रहे थे, पूछने पर पता चला वो उसके पति के घर वाले थे जो उसे घर से निकाल रहे थे क्योंकि वो अपने पहले पति और 2 बच्चों को छोड़कर आई थी और उसके पति की भी पहले शादी हो चुकी थी और वो ऐसे ही दूसरी औरतों को फंसा कर शादी करता है और कुछ दिन बाद छोड़ देता है।
महिला को अपनी ग़लती पर पछतावा था, उसके घर वाले आकर उसे भी ले गए , पर जाते जाते उसने जो कहा उससे मुझे कुछ सीखने को मिला। उसने मुझसे कहा दीदी मैं आज अगर ज़िंदा हूँ तो सिर्फ आपके प्यार और अपनेपन के वजह से। मैंने कई बार आत्महत्या करने की कोशिश की पर आपसे जुड़े दिल के रिश्ते ने मुझे रोक लिया।
दोस्तों मैंने अनजाने में ही सही पर अपने प्यार और अपनेपन से एक ग़ैर इंसान को आत्महत्या करने से रोक दिया तो क्या आप किसी अपने को नहीं बचा सकते?
आपसे प्रार्थना है की किसी अपने को अकेला न छोड़ें। कोई कितना भी अमीर बन जाए वो पैसों से कभी अकेलापन दूर नहीं कर सकता। इसलिए “आत्महत्या रोकने के लिए नैतिक समर्थन और सहानुभूति: जानें कैसे बचाएं एक जीवन”
Comment में अपनी राय देना न भूले और दिल के रिश्ते आपके लिए क्या मायने रखते हैं ये भी ज़रूर बताएँ।
“आत्महत्या रोकने के लिए नैतिक समर्थन और सहानुभूति:” के सौजन्य से।
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