गृहिणी: सम्पूर्ण समर्पण की जीती जागती मूर्ति।
वह स्त्री जो अपना संपूर्ण समर्पण देती है – लेकिन अक्सर अनदेखी रह जाती है
परिचय: (गृहिणी: सम्पूर्ण समर्पण की जीती जागती मूर्ति।)
हमारे समाज में “गृहिणी” का अर्थ अक्सर सीमित कर दिया गया है – एक महिला जो घर संभालती है, खाना बनाती है, बच्चों को पालती है और घर के हर सदस्य की देखभाल करती है। लेकिन क्या कभी हमने यह सोचा कि वह महिला, जो हर किसी का ख्याल रखती है, क्या खुद के लिए भी जी पाती है? क्या उसकी परेशानियाँ, इच्छाएँ, सपने और थकान को समझा जाता है?
गृहिणी का जीवन बहुत कुछ कहता है – लेकिन वह खुद बहुत कम कहती है। पर एक दिन ऐसा भी आ जाता है जब उसकी सहनशीलता का बांध टूट जाता है और फिर वह पागलों की तरह अपनी बातों को चिल्ला कर बोलना शुरू करती है। और आपको पता है इसके बाद घर के लोग उसका पति , उसके बच्चे सब उससे दूर भागने लगते हैं। पर क्या यह सही है ? क्या कोई ये जानने की कोशिश करता है की उनके स्वभाव में अचानक आए हुए बदलाव का क्या कारन है ?
यकीन मानिये वो टूट रही है , बिखर रही है , मानसिक रूप से बीमार हो रही है। पास रहिये , सम्हालिए , अपने होने का एहसास दिलाइये वरना वो इतनी दूर चली जाएगी जहाँ से वापस लाना नामुमकिन हो जाएगा। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि गृहिणी के जीवन में क्या-क्या चुनौतियाँ आती हैं, उसकी परेशानियाँ क्या होती हैं, और वह किन बलिदानों से गुजरती है।
1. घर के काम को 'काम' न समझना
समस्या:
गृहिणी पूरे दिन काम करती है – सुबह से लेकर रात तक बिना रुके। खाना बनाना, बर्तन साफ करना, कपड़े धोना, बच्चों को स्कूल भेजना, परिवार की ज़रूरतें पूरी करना। लेकिन दुर्भाग्यवश, इन कार्यों को ‘काम’ नहीं समझा जाता।
समाधान:
यह समझना ज़रूरी है कि घर का काम भी एक पूर्णकालिक नौकरी है।
परिवार और समाज को गृहिणी के कार्यों की सराहना करनी चाहिए।
2. आर्थिक निर्भरता और आत्मनिर्भरता की कमी
समस्या:
गृहिणियाँ खुद के खर्चों के लिए भी पति पर निर्भर होती हैं। इससे उनका आत्मविश्वास कम होता है और कई बार उन्हें खुद को साबित करने की ज़रूरत महसूस होती है।
समाधान:
गृहिणियाँ छोटे-छोटे घरेलू व्यवसाय शुरू कर सकती हैं, जैसे: सिलाई, टिफिन सेवा, ऑनलाइन ट्यूटरिंग या यूट्यूब चैनल।
परिवार को उन्हें सपोर्ट देना चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
3. पहचान की अनदेखी
समस्या:
विवाह के बाद एक महिला की पहचान केवल “बहू”, “पत्नी”, “माँ” बनकर रह जाती है। वह अपने नाम, अपने सपनों और अपने अस्तित्व को कहीं खो देती है।
हर महिला को अपने लिए कुछ समय निकालना चाहिए – जिसमें वह खुद को जिए, सीखे और बढ़े।
पति और परिवार को चाहिए कि वे उसे उसका आत्मसम्मान लौटाएं और पहचान बनाए रखने में सहयोग करें।
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4. मानसिक थकावट और अकेलापन
समस्या:
गृहिणी का काम ‘न थमने वाला’ होता है। यह एक ऐसा काम है जहाँ छुट्टी नहीं, आराम नहीं और बहुत बार ‘धन्यवाद’ भी नहीं। इससे वह मानसिक रूप से थक जाती है, चिड़चिड़ी हो जाती है और धीरे-धीरे अकेलापन महसूस करने लगती है।
समाधान:
परिवार को चाहिए कि वह घर के कामों में मदद करें और छुट्टी के दिन उसे भी छुट्टी दें।
गृहिणी को भी अपनी हॉबीज़ के लिए समय निकालना चाहिए – जैसे पढ़ना, संगीत, ध्यान या टहलना।
5. स्वास्थ्य की अनदेखी
समस्या:
गृहिणी सबसे पहले दूसरों के बारे में सोचती है और अंत में खुद के बारे में। वह समय पर खाना नहीं खाती, व्यायाम नहीं करती, और अपनी बीमारियों को टालती रहती है।
समाधान:
हर महिला को महीने में कम से कम एक दिन अपने लिए रखना चाहिए – मेडिकल चेकअप, योग या सैर के लिए।
परिवार को उसे समय-समय पर आराम देने और सेहत का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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6. सामाजिक दबाव और आलोचना
समस्या:
गृहिणी पर समाज और परिवार से हमेशा “आदर्श बहू”, “त्यागी माँ” या “समझदार पत्नी” बनने का दबाव रहता है। एक गलती होने पर उसकी आलोचना होती है, लेकिन सही करने पर सराहना कम मिलती है।
समाधान:
महिलाओं को यह समझना होगा कि वो इंसान हैं, परफेक्ट बनने की मशीन नहीं।
परिवार और समाज को उनके छोटे-छोटे प्रयासों की तारीफ करनी चाहिए।
7. निर्णयों में भागीदारी की कमी
समस्या:
अक्सर घर के महत्वपूर्ण निर्णय – जैसे बच्चों की पढ़ाई, बजट, निवेश आदि – में गृहिणी की राय नहीं ली जाती, क्योंकि उसे ‘अनपढ़’ या ‘घर तक सीमित’ समझा जाता है।
समाधान:
हर परिवार को चाहिए कि वे गृहिणी की राय को सम्मान दें और उन्हें निर्णयों में शामिल करें।
उनके अनुभव और समझ का इस्तेमाल परिवार को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
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गृहिणियों के बलिदान
गृहिणी अपने जीवन में कई छोटे-बड़े बलिदान देती है, जो अक्सर अनकहे रह जाते हैं:
अपने करियर को छोड़ देना
अपने सपनों को दूसरों के सपनों के लिए त्याग देना
अपनी इच्छाओं को परिवार के अनुसार बदल लेना
दिन-रात बिना थके काम करते रहना, बिना किसी शिकायत केइन बलिदानों को कभी-कभी ‘कर्तव्य’ मान लिया जाता है, लेकिन ये त्याग तभी मूल्यवान होते हैं जब उन्हें समझा और सराहा जाए।
गृहिणियों के लिए प्रोत्साहन के कदम:
गृहिणी अपने जीवन में कई छोटे-बड़े बलिदान देती है, जो अक्सर अनकहे रह जाते हैं:
अपने करियर को छोड़ देना
अपने सपनों को दूसरों के सपनों के लिए त्याग देना
अपनी इच्छाओं को परिवार के अनुसार बदल लेना
दिन-रात बिना थके काम करते रहना, बिना किसी शिकायत के
इन बलिदानों को कभी-कभी ‘कर्तव्य’ मान लिया जाता है, लेकिन ये त्याग तभी मूल्यवान होते हैं जब उन्हें समझा और सराहा जाए।
निष्कर्ष:
गृहिणी एक ऐसी शक्ति है जो बिना किसी शोर के, हर दिन अपने परिवार के लिए लड़ती है। उसका काम दिखता नहीं, लेकिन उसका असर हर मुस्कराते चेहरे में होता है। अब समय आ गया है कि हम उनके त्याग और संघर्ष को सिर्फ “नारी धर्म” न कहें, बल्कि उसे सम्मान, सहयोग और सराहना से स्वीकार करें।
आइए, हम सब मिलकर यह प्रण लें:
“हम घर की गृहिणी को सिर्फ जिम्मेदारी का प्रतीक नहीं, बल्कि परिवार की शक्ति का प्रतीक मानें।”
आपसे एक सवाल:
क्या आपने कभी अपनी माँ, पत्नी, या बहन के जीवन को इस नजरिए से देखा है? आज ही उन्हें धन्यवाद कहिए और उनके त्याग को सलाम की
आप को गृहिणी: सम्पूर्ण समर्पण की जीती जागती मूर्ति।ब्लॉग कैसा लगा अपनी राय कमेंट में जरूर दे , धन्यवाद।
“हँसते रहिये हँसाते रहिये, रिश्तों को मधुर बनाते रहिये”
मिलते हैं अगले ब्लॉग में, तब तक के लिए धन्यवाद।