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धनतेरस क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है

धनतेरस क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है

भारत में हर त्योहार का अपना विशेष अर्थ और संदेश होता है। दीपावली से पहले आने वाला धनतेरस भी ऐसा ही एक शुभ पर्व है, जो न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य और शुभारंभ का प्रतीक भी माना जाता है।
इस दिन को “धनत्रयोदशी” भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।

धनतेरस का अर्थ केवल धन से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह उस सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है जो जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली लाती है।

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धनतेरस का पौराणिक महत्व

धनतेरस से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें से दो सबसे प्रसिद्ध हैं:

1. धनवंतरि भगवान का जन्म

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय धनवंतरि भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
भगवान धनवंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है।
इसलिए इस दिन को स्वास्थ्य की देवी/देवता की आराधना का दिन भी कहा जाता है।
यही कारण है कि इस दिन स्वास्थ्य संबंधी वस्तुएँ खरीदना और भगवान धनवंतरि की पूजा करना शुभ माना जाता है।

2. राजा हेम के पुत्र की कथा

एक अन्य कथा के अनुसार, एक ज्योतिषी ने राजा हेम को बताया कि उनके पुत्र की मृत्यु विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से हो जाएगी।
राजा और रानी ने अपने पुत्र को बचाने के लिए उपाय किए।
विवाह के दिन उनकी पत्नी ने दरवाज़े पर दीपक जलाए और घर को सोने-चांदी के सिक्कों से भर दिया ताकि सर्प की नज़र उसके पति तक न पहुँचे।

जब यमराज सर्प के रूप में आए, तो दीपक और आभूषणों की रोशनी से उनकी आँखें चौंधिया गईं और वे अंदर न जा सके।
इस तरह उस दिन पति की जान बच गई।
तब से यह दिन “यम दीपदान” और “धनतेरस” के रूप में मनाया जाने लगा।
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धनतेरस शब्द का अर्थ

‘धन’ का अर्थ है — समृद्धि, संपत्ति, स्वास्थ्य और शुभता।

‘तेरस’ का अर्थ है — त्रयोदशी तिथि।

इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, इलेक्ट्रॉनिक सामान, और नई चीजें खरीदते हैं, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु भविष्य में शुभ फल देती है।

धनतेरस पर खरीदारी का महत्व

धनतेरस के दिन बाजारों में रौनक देखते ही बनती है। लोग इस दिन कुछ न कुछ नया अवश्य खरीदते हैं।
इस परंपरा के पीछे गहरा अर्थ छिपा है —

नई शुरुआत का प्रतीक:
इस दिन नया सामान खरीदना आने वाले वर्ष में नई ऊर्जा और प्रगति का संकेत माना जाता है।

धनवृद्धि की कामना:
मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना-चांदी या अन्य धातु देवी लक्ष्मी को प्रिय होती है, जिससे घर में धन की वृद्धि होती है।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार:
नया सामान, साफ-सफाई और रोशनी जीवन में सकारात्मकता लाते हैं।

क्या खरीदें और क्या न खरीदें

क्या खरीदें:

  • सोना या चांदी – धन और समृद्धि का प्रतीक
  • बर्तन (कॉपर, स्टील, सिल्वर) – शुभता का प्रतीक
  • झाड़ू – लक्ष्मी जी का प्रतीक माना जाता है
  • धनवंतरि जी की मूर्ति – स्वास्थ्य के लिए शुभ
  • लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा – दीपावली पूजन के लिए

क्या न खरीदें:

  • लोहे की वस्तुएँ
  • काले रंग की चीजें
  • तेल या टूटी-फूटी वस्तुएँ

इन चीजों को इस दिन खरीदना अशुभ माना जाता है।

धनतेरस का आध्यात्मिक महत्व

धनतेरस केवल बाहरी समृद्धि का नहीं, बल्कि आंतरिक समृद्धि का भी प्रतीक है।
यह हमें यह सिखाता है कि सच्चा “धन” केवल पैसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार, प्रेम और संतोष है।

  • यह त्योहार हमें कृतज्ञता (Gratitude) सिखाता है — जो हमारे पास है, उसकी सराहना करना।
  • यह सकारात्मक सोच और नई शुरुआत का प्रतीक है।
  • यह दिन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है, जैसे दीपावली देती है।

धनतेरस पर की जाने वाली परंपराएँ

घर की सफाई और सजावट:
धनतेरस से दीपावली की तैयारियाँ शुरू होती हैं। लोग अपने घरों को साफ करते हैं और रंगोली बनाते हैं।

दीपदान:
शाम को यमराज के नाम का दीप जलाया जाता है, जिसे “यम दीपदान” कहा जाता है।
यह दीपक मृत्यु और नकारात्मकता से रक्षा का प्रतीक होता है।

धनवंतरि पूजा:
इस दिन भगवान धनवंतरि की पूजा कर स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है।

संपत्ति की पूजा:
व्यापारी अपने खातों, तिजोरी और दुकान की पूजा करते हैं ताकि आने वाला वर्ष लाभदायक हो।

नया सामान खरीदना:
जैसा कि पहले बताया गया, कुछ नया खरीदना शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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धनतेरस का हमारे जीवन में महत्व

1. स्वास्थ्य का प्रतीक

धनवंतरि भगवान के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हमें स्वास्थ्य का महत्व याद दिलाता है।
कहावत है — “पहला सुख निरोगी काया।”
इसलिए धनतेरस हमें सिखाता है कि सच्चा धन स्वास्थ्य है।

2. आर्थिक समृद्धि का प्रतीक

यह दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का दिन है।
लोग अपने व्यवसाय और परिवार में आर्थिक स्थिरता की कामना करते हैं।

3. सकारात्मक सोच और नई शुरुआत

हर नया दीप, हर नया बर्तन और हर नई वस्तु एक नई शुरुआत का संकेत है।
यह हमें पुराने अंधेरे से बाहर निकलकर नई रोशनी अपनाने का अवसर देता है।

4. आस्था और कृतज्ञता का पर्व

यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि आस्था और विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
जब हम ईश्वर का धन्यवाद करते हैं, तो हमारे जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है।

आधुनिक जीवन में धनतेरस का संदेश

आज के समय में, जब जीवन की गति तेज़ हो चुकी है, धनतेरस हमें ठहरने और सोचने का अवसर देता है —

  • क्या हम वास्तव में “धनवान” हैं?
  • क्या हमारे पास स्वास्थ्य, परिवार और मन की शांति है?

धनतेरस हमें बताता है कि सच्चा धन केवल भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि अच्छे विचारों, रिश्तों और संतोष में छिपा है।

धनतेरस मनाने का सही तरीका

धनतेरस मनाने का सही तरीका

  • घर की पूरी सफाई कर दीप जलाएँ।
  • भगवान धनवंतरि और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करें।
  • अपने बड़ों का आशीर्वाद लें।
  • जरूरतमंदों को दान दें — यह सबसे बड़ा पुण्य है।
  • परिवार के साथ समय बिताएँ, क्योंकि यही असली संपत्ति है।

निष्कर्ष

धनतेरस केवल धन-संपत्ति का त्योहार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और कृतज्ञता का पर्व है।
यह हमें यह सिखाता है कि जीवन में भौतिक चीज़ों के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक सुख भी जरूरी हैं।

“जहाँ दीपक जलता है, वहाँ अंधकार नहीं रह सकता —
धनतेरस भी जीवन के अंधकार को मिटाकर आशा और उजाले का संदेश देता है।”

“हँसते रहिये हँसाते रहिये, रिश्तों को मधुर बनाते रहिये”

मिलते हैं अगले ब्लॉग में, तब तक के लिए धन्यवाद।

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