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बच्चों को अच्छे संस्कार कैसे दें

बच्चों को अच्छे संस्कार कैसे दें

आज के बदलते समय में बच्चों की परवरिश सिर्फ अच्छे स्कूल और अच्छी पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गई है। असल में बच्चों की सबसे बड़ी पूंजी उनके संस्कार होते हैं। संस्कार ही वो बीज हैं, जो उनके व्यक्तित्व, सोच, व्यवहार और जीवन के हर फैसले को दिशा देते हैं। यह बीज घर में बोए जाते हैं, और माता-पिता, दादा-दादी, घर का माहौल और पारिवारिक मूल्य इन बीजों को सींचते हैं।

अगर बच्चों को सही संस्कार मिलते हैं, तो वे जीवन की चुनौतियों में भी सही रास्ता चुन पाते हैं, अपने बड़ों का सम्मान करते हैं और समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनकर सामने आते हैं। आज के समाज में जिस तरह से अपराध और दुष्कर्म बढ़ रहे हैं , ये कहीं न कहीं संस्कारों की कमी का असर है। हमारा बच्चा घर के बाहर जाकर किन लोगों के साथ रहेगा और क्या सीखेगा इसका नियत्रण पूरी तरह से हमारे हाथ में नहीं है। 

पर घर के अंदर अगर हर एक घर में बच्चों को सही संस्कार मिले तो शायद समाज की एक बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।

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1. संस्कार क्यों ज़रूरी हैं?

चरित्र निर्माण – संस्कार बच्चों को सही-गलत की पहचान कराते हैं। सही गलत का अंतर और उसके परिणाम का बोध आपके बच्चे को होगा तो कुछ भी गलत करने से पहले उसकी अंतरात्मा उसे रोकेगी और शायद वो कुछ अपराध करने से रुक जाए 

जीवन के निर्णय – सही मूल्यों के साथ पले-बढ़े बच्चे मुश्किल वक्त में भी सही निर्णय लेते हैं। इसके लिए चाहिए की बच्चों को अपने निर्णय खुद लेने का मौका दें। ताकि उनमे निर्णय लेने की शक्ति का विकास हो।

समाज में योगदान – अच्छे संस्कार बच्चों को सहयोगी, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाते हैं। अगर कोई इंसान आपके सामने आ जाए जिसे आपकी मदद की ज़रूरत हो तो बिना सोचे की वो अपना है या पराया, जानपहचान का है या अंजाना, उसकी मदद कर दें ताकि बच्चे समाज को अपनाना सीखें। 

उदाहरण:
एक बच्चा जब देखता है कि उसके माता-पिता घर के काम में नौकर या सहायकों के साथ भी सम्मान से बात करते हैं, तो वह भी अपने जीवनभर यही व्यवहार अपनाता है।

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2. बच्चों के संस्कार मजबूत करने में परिवार की भूमिका

माता-पिता का आचरण – बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। अगर माता-पिता बड़ों का सम्मान करते हैं, समय का पालन करते हैं, और ईमानदारी से काम करते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा।

दादा-दादी का अनुभव – संयुक्त परिवार में बच्चों को बुजुर्गों से कहानियाँ, जीवन के अनुभव और नैतिक शिक्षा मिलती है, जो किताबों में नहीं मिलती।

पारिवारिक माहौल – घर का वातावरण जितना सकारात्मक और प्रेमपूर्ण होगा, बच्चों के संस्कार उतने ही गहरे होंगे।

3. बच्चों में अच्छे संस्कार डालने के 10 आसान तरीके

(1) खुद उदाहरण बनें
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा झूठ न बोले, तो पहले खुद को यह आदत छोड़नी होगी। बच्चे ‘कहने’ से ज्यादा ‘देखने’ से सीखते हैं।

(2) पारिवारिक रिवाज और परंपराएं अपनाएं
त्योहार मनाना, पूजा-पाठ करना, परिवार के साथ खाना खाना – ये सब बच्चों को जड़ों से जोड़ते हैं।

(3) कहानियों का महत्व
पंचतंत्र, रामायण, महाभारत या प्रेरणादायक कहानियां बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाती हैं।
उदाहरण: दादी की एक कहानी जिसमें ईमानदारी से जीवन जीने वाला गरीब किसान अंत में राजा का मित्र बनता है – यह बच्चे के मन में ईमानदारी की गहरी छाप छोड़ता है।

(4) सेवा और मदद की आदत डालें
बच्चों को सिखाएं कि जरूरतमंद की मदद करना पुण्य का काम है – चाहे वो किसी गरीब को खाना खिलाना हो या किसी बीमार दोस्त की देखभाल करना। (आप पढ़ रहें हैं ब्लॉग बच्चों को अच्छे संस्कार कैसे दें )

(5) जिम्मेदारी देना
घर के छोटे-छोटे काम जैसे अपना बिस्तर ठीक करना, पानी के पौधों को देना – ये बच्चों में जिम्मेदारी और अनुशासन लाते हैं।

(6) सकारात्मक भाषा का प्रयोग
बच्चों से डांटने के बजाय समझाना, और उनकी गलतियों पर प्यार से सुधार करना, उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

(7) समय का महत्व सिखाएं
समय पर उठना, पढ़ना, खेलना और सोना – यह आदतें बच्चों को जीवनभर अनुशासन में रखती हैं।

(8) बड़ों का सम्मान
बच्चों को नमस्ते करना, आशीर्वाद लेना और बड़ों की बातें ध्यान से सुनना सिखाएं।

(9) प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ाव
पेड़ लगाना, पानी बचाना और जानवरों से प्यार करना – ये मूल्य बच्चों को संवेदनशील बनाते हैं।

(10) आभार व्यक्त करना
हर छोटी चीज़ के लिए ‘धन्यवाद’ कहना – यह बच्चों में कृतज्ञता की आदत डालता है।

4. आज के समय में चुनौतियां और समाधान

चुनौती 1: मोबाइल और सोशल मीडिया का असर
बच्चे असली जीवन के अनुभवों से दूर हो रहे हैं और वर्चुअल दुनिया में खो जाते हैं।
समाधान:

स्क्रीन टाइम सीमित करें।

साथ में आउटडोर गेम्स और पारिवारिक गतिविधियों को बढ़ावा दें।

चुनौती 2: एकल परिवार में सीमित सीख
दादा-दादी या बड़ों का अनुभव बच्चों तक कम पहुंच पाता है।
समाधान:

बच्चों को समय-समय पर बड़ों से मिलने ले जाएं।

वीडियो कॉल या फोन से भी उनके अनुभव साझा करवाएं।

चुनौती 3: माता-पिता का व्यस्त शेड्यूल
माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय कम होता है।
समाधान:

रोज़ कम से कम 30 मिनट बच्चों के साथ बिना मोबाइल के बिताएं।

एक दिन ‘फैमिली डे’ तय करें, जिसमें सब मिलकर समय बिताएं।

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5. एक छोटी भावनात्मक कहानी

रीना एक कामकाजी माँ थी, और उसका 10 साल का बेटा आरव पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन दोस्तों के साथ झगड़ालू हो गया था। रीना ने नोटिस किया कि वह घर में भी नौकरों से ठीक से बात नहीं करता।
एक दिन रीना ने उसे अपने साथ अनाथालय ले गई, जहाँ बच्चों के पास खेलने के लिए खिलौने तक नहीं थे। वहां आरव ने अपने पुराने खिलौने और किताबें बांटीं। घर आते समय उसने कहा, “माँ, मैं भी उन बच्चों के लिए कुछ बनाना चाहता हूँ।”
उस दिन के बाद आरव का व्यवहार बदल गया, क्योंकि उसने मदद और दया का असली मतलब महसूस किया।

निष्कर्ष

संस्कार बच्चों को जीवनभर सही राह दिखाने वाला कंपास होते हैं। यह सिर्फ उपदेश से नहीं, बल्कि माता-पिता और परिवार के आचरण, माहौल और प्रेम से आते हैं। अगर हम बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देंगे, तो वे न केवल एक अच्छे इंसान बनेंगे बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले भी बनेंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।

1. बच्चों को अच्छे संस्कार देने की शुरुआत कब करनी चाहिए?

बच्चों को अच्छे संस्कार देने की शुरुआत जन्म से ही होनी चाहिए। उनके सामने अच्छा व्यवहार और आदर्श प्रस्तुत करना सबसे पहला कदम है।

नहीं, परिवार के सभी सदस्य, स्कूल और समाज भी बच्चों के संस्कार निर्माण में योगदान देते हैं।

 

खुद उदाहरण बनें, बड़ों का सम्मान करें, और बच्चों को भी विनम्र भाषा और व्यवहार सिखाएं।

 

हाँ, यह बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ती है और जीवन में सही दिशा देती है।

 

धैर्य से समझाएं, सही और गलत में फर्क बताएं और सकारात्मक माहौल बनाएं।

“हँसते रहिये हँसाते रहिये, रिश्तों को मधुर बनाते रहिये”

मिलते हैं अगले ब्लॉग में, तब तक के लिए धन्यवाद।

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