आज हम समझेंगे बुजुर्गों का महत्व। हमारे जीवन में क्या होता है।
बुजुर्ग हमारे जीवन की जड़ें हैं। उनका सम्मान करना और उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक सौभाग्य है।
नमस्ते मेरे प्यारे पाठकों । मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ आप का दिन मंगलमय रहे।आज मैं बुजुर्गों का महत्व आप सभी के सामने प्रकाशित करुँगी। लिखना तो बहोत कुछ चाहती हूँ पर कभी कभी समझ नहीं आता क्या लिखूं।हमारे समाज में रिश्तों को समझना और निभाना सबसे कठिन काम बनता जा रहा है। फिर भी मैं एक कोशिश में हूँ की रिश्तों की मिठास बनी रहे। ज़ाहिर सी बात है ऐसा कुछ भी नहीं जो मैं लिखू और आपने उसी बात का अनुभव कभी नहीं किया हो।
आज मैं आपके साथ एक घटना साझा करना चाहती हूँ, और आप से उम्मीद करती हूँ की अगर मैं कहीं गलत हो जाऊं तो आप उसपर अपने विचार जरूर कमेंट करेंगे।बात एक हफ्ते पहले की है, मैं बाजार गई थी। रविवार का दिन था , छुटटी का दिन होने के कारन काफी भीड़ थी। सभी लोग अपनी खरीदारी में लगे थे। तभी मेरी नज़र एक बुजुर्ग आदमी पर पड़ी। शायद वो अपने बेटे के साथ आए थे। उम्र करीबन 80 साल रही होगी। दुबले पतले से भीड़ के बीच में आस्ते-आस्ते अपने बेटे के पीछे -पीछे मासूम बच्चे की तरह चल रहे थे।उनका बेटा थोड़ी दूर जाकर एक बार पीछे मुड़ कर देख लेता और फिर अपनी खरीदारी में व्यस्त हो जाता। अचानक मैंने देखा उस बुजुर्ग आदमी के चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान बिखर गई।
मैंने सोचा ऐसा उन्होंने क्या देख लिया जो इतने प्रसन्न दिखाई दे रहे। मुझे ऐसा अनुभव हुआ जैसे किसी छोटे बच्चे को अपना मन पसंद खिलौना दिख गया हो। मैंने फिर उस तरफ देखा जहाँ उनकी नज़र जैसे रुक सी गई है। मैंने जब ध्यान से देखा तो पता चला उनका दिल बर्फ के गोले बेचने वाले ठेले पर आ गया है। वो जैसे बेचैन से हो गए, मानो
कह रहे हों मुझे अभी के अभी चाहिए। उनके चेहरे का भाव ऐसा था जैसे उनके मुँह में पानी आ रहा हो और उस पानी को वो बार बार निगल लेते और एक टक ठेले को देखे जा रहे थे।
वह बस अपने बेटे के खरीदारी खत्म करने का इंतज़ार कर रहे थे । तभी एक आवाज़ आई। पिताजी चलिए हो गया। यह कहते हुए बेटा अपनी मोटर साईकल की तरफ चल पड़ा। जैसे अचानक उसको देर होने लगी। जल्दी आइये पिताजी मुझे अभी बहोत सारा काम है। बुजुर्ग थोड़ा सहम गए।
आप पढ़ रहे हैं ब्लॉग बुजुर्गों का महत्व।
हाथों के इशारे से वो बार-बार ठेले की तरफ दिखाते , पर उनके बेटे को जैसे सुनना ही नहीं था उनकी बातों को। उसने मोटर साईकल स्टार्ट की और उनके पास लेकर चला आया, उन्होंने कुछ बोलना चाहा पर बेटे ने अब चिल्लाना शुरू कर दिया था। अब वो चुप हो गए। दिल में उमड़ती हुई चाहत पर जैसे अंकुश लग गया।
बिना कुछ बोले वो जाकर बैठ गए। आँखों में चमकने वाली ख़ुशी अचानक से नम हो गई। भीगी पलकों और सूखे होठों के साथ वो ठेले को देखते हुए वहां से चले गए।
मैं बस खड़ी होकर देखती रह गई , उनके जाने के बाद एक अजीब सी बेचैनी ने मेरे दिल और दिमाग में हलचल मचा दी। मैंने तो सिर्फ आज एक ही बुजुर्ग को देखा, इनकी तरह न जाने कितने ऐसे होंगे जिन्होंने अपनी छोटी छोटी ख्वाहिशों को सीने में दफन करके इस दुनियां को अलविदा भी कर दिया होगा। और उनके जाने के बाद पता चलता है हमे बुजुर्गों का महत्व।
हमारे माता-पिता हमें पाल पोश कर बड़ा करते करते कब बूढ़े हो जाते हैं उनको पता ही नहीं चलता। हम जब गृहस्त जीवन में जाते हैं, अपने परिवार (बच्चों ) का पालन पोषण करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं की बूढ़े माता पिता की ज़रूरतें पूछने का समय भी नहीं होता।
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मैं बस इतना पूछना चाहती हूँ की जिन लोगों ने अपनी सारी इच्छाओं को मार कर हमें सब कुछ दिया, क्या ये सही है के उनकी इच्छाएँ बुढ़ापे में भी अधूरी रहें ? मैंने “बूढ़ी काकी ” कहानी में पढ़ा था “बुढ़ापा बचपन का पुनरागमन होता है”।इसलिए हम सभी को अपने माता पिता का वैसा ही ध्यान रखना चाहिए जैसा की हम अपने बच्चों का रखते हैं। मुझे पता हैं आज की भागती ज़िन्दगी में इतना वक़्त नहीं होता, फिर भी इतना असंभव भी नहीं की हम उनकी इच्छाओं को समझें और उनको पूरा करें।जिन घरों में माता पिता का सम्मान होता है, उनकी इच्छाओं का सम्मान होता है वह घर मंदिर से कम नहीं होता। ईश्वर की कृपा से उस घर से खुशियां कभी नहीं जाती।
आप सभी से निवेदन करती हूँ की अगर आप के घर में भी कोई बुजुर्ग हैं तो उनकी सच्चे दिल से सेवा करें। उनकी आँखों में आँशु न आने दें। ईश्वर कभी आप से नाराज़ नहीं होंगे।बुजुर्ग हमारे जीवन की छावं होते हैं। हमें जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करना सिखाते हैं। उनका आशीर्वाद हमें कठिनाइयों से निकलने की शक्ति देता है।उनका सुझाव हमे ग्रहस्त जीवन को सही से चलने का मार्ग दिखाता हैं। बुजुर्ग हमारे जीवन का अनमोल हिस्सा होते हैं। उनका जीवन अनुभव, उनका मार्गदर्शन और उनका स्नेह हमें एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
आइए जानें हमारे जीवन में बुजुर्गों का महत्व।
- अनुभव और ज्ञान का भंडार
बुजुर्गों ने जीवन के कई उतार-चढ़ाव देखे होते हैं। उनका अनुभव हमें सही दिशा में निर्णय लेने में मदद करता है।
- संस्कारों और परंपराओं के संरक्षक
वे हमारी संस्कृति, रीति-रिवाज और पारिवारिक मूल्यों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं।
- भावनात्मक सहारा
बुजुर्गों की उपस्थिति परिवार को मानसिक शांति, स्नेह और स्थिरता देती है। वे संकट में हमारा सहारा बनते हैं।
- नैतिक मार्गदर्शन
वे हमें जीवन में सही और गलत की पहचान कराते हैं और अच्छे चरित्र के निर्माण में सहायक होते हैं।
- बच्चों के पालन-पोषण में सहयोगी
दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों को प्यार, संस्कार और धैर्य से जीवन के मूल्य सिखाते हैं।
परिवार को एकजुट रखने वाली शक्ति
उनका आशीर्वाद और उपस्थिति परिवार को एक सूत्र में बाँधकर रखती है।
निष्कर्ष:
बुजुर्ग हमारे जीवन की जड़ें हैं। उनका सम्मान करना और उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक सौभाग्य है।
“जो चलते थे हमारे लिए छांव बनाकर,
आज वही थक गए हैं उम्र का पड़ाव पाकर।
चलो कुछ पल उनके साथ बिता लें,
उनकी मुस्कान से फिर घर सजा लें।
संघर्षों की जो किताब हैं वो,
हमारे जीवन का जवाब हैं वो।
आओ बुजुर्गों का मान बढ़ाएं,
संस्कारों की यह लौ फिर से जलाएं।”
बुजुर्गों का महत्व।ब्लॉग पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद।
अगर आप को मेरा यह ब्लॉग पसंद आए तो लाइक करना ना भूले, कुछ छूट गया हो मुझसे तो कमेंट में जरूर बताएं। आप की राय मेरे लिए बहोत महत्वपूर्ण है। आगे भी रिश्तों को मज़बूत बनाने की कोशिश में ब्लॉग लिखूंगी। क्योंकि आज के समाज में रिश्तों की बहोत भयावह अवस्था है। और इसे ठीक करने की ज़िम्मेदारी हम सभी की है।
“हँसते रहिये हँसाते रहिये, रिश्तों को मधुर बनाते रहिये”
मिलते हैं अगले ब्लॉग में, तब तक के लिए धन्यवाद।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।
1. बुजुर्गों को हमारे जीवन में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
बुजुर्ग हमारे अनुभव, संस्कार और संस्कृति के जीते-जागते स्रोत होते हैं। उनका मार्गदर्शन जीवन को सही दिशा देता है और परिवार को जोड़कर रखता है।
क्या बुजुर्गों की इच्छाएं पूरी करना हमारा कर्तव्य है?
हाँ, उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी हमें पालने-पोसने में लगा दी। अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखें और उन्हें प्यार और सम्मान दें।
क्या बुजुर्गों की देखभाल सिर्फ उनके बच्चों की जिम्मेदारी है?
नहीं, बुजुर्ग पूरे परिवार की जिम्मेदारी होते हैं। चाहे बच्चे हों या पोते-पोतियाँ, हर सदस्य को उनका सम्मान और सेवा करनी चाहिए।
आजकल की व्यस्त जीवनशैली में बुजुर्गों का ध्यान कैसे रखें?
समय भले ही कम हो, लेकिन दिल से की गई थोड़ी सी सेवा, रोज़ की बातचीत, और उनकी इच्छाओं का ध्यान – बहुत कुछ बदल सकता है। यह भावनात्मक जुड़ाव उन्हें सबसे ज्यादा खुशी देता है।
बुजुर्गों की उपेक्षा समाज पर कैसे असर डालती है?
बुजुर्गों की उपेक्षा से न केवल परिवार कमजोर होता है, बल्कि समाज में नैतिक और भावनात्मक संतुलन भी बिगड़ता है। यह एक ऐसी परंपरा को तोड़ता है जो पीढ़ियों को जोड़ती आई है।
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