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अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

आइये जानते हैं कैसे हम अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

पापा जब ऑफिस से घर आते, हम दौड़ कर उनके पास पहुंच जाते, क्या लाये हैं आप हमारे लिए ये बोलकर चिल्लाते, पसीनें से भीगे पापा हमें देख कर मुस्कुराते थे । फिर अपने जेब से कुछ निकाल कर हमारे हांथों पे रख देते थे। मम्मी कहती आप हाथ मुँह धो लिजिये मैं खाना निकलती हूँ , उनकी थाली में खाने के लिए हम भाई बहन लड़ जाते थे।  हमारे झगड़े सुलझाने को पापा अपने हाथों से ही हमें खिलाते थे।

चाचा, चाची, दादा, दादी, मामा, मामी, नाना, नानी भाई और बहन न जाने कितने रिश्तों का मेला है। इतने बड़े मेले में भी फिर क्यों इंसान अकेला है।

क्यों न हम सब अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

एक वो दिन था जब घर के पुरुष कमाते थे और घर की औरतें घर सम्हाला करती थी। फिर भी आराम से परिवार चलता था, किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी। सारे रिश्ते निभाए जाते थे।

आज घर के सारे लोग कमाते हैं, रिश्ता निभाने का किसी के पास वक़्त ही नहीं है। घर में सारी सुविधाएं मौजूद है, पर अपने दिल से पूछ कर देख लिजिये क्या आपको नहीं लगता जीवन में कुछ कमी सी है?

अगर आप ऐसा सोचते हैं हैं की पैसों से ही खुशियाँ खरीदी जा सकती हैं तो क्या आप ऐसे किसी करोड़पति को जानते हैं जिसके जीवन में कोई दुःख नहीं या वो अपने कमाये हुए धन से संतुष्ट है तो मुझे comment में जरूर बताए। थोड़ा या ज्यादा सभी के जीवन में मुश्किलें रहती हैं। और आप को पता है इन मुश्किलों से हमे लड़ने का हौसला कौन देता है, इन मुश्किलों में हमारा साथ कौन देता है, जी हाँ आप ने सही समझा हमारा परिवार या वे लोग जो हमे प्यार करते हैं। इसलिए मैं बार बार कहती हूँ की अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

चलिए एक घटना से आप को परिवार का महत्व समझाने की कोशिश करती हूँ और जानते हैं कैसे हम अपने जीवन को पहचाने । रिश्तों की अहमियत को जाने।

हाल ही में दिल्ली की एक घटना मैंने सुनी जिसमे पति और पत्नी दोनों वर्किंग थे। उनकी एक 3 साल की बेटी थी जिसको वो एक नौकरानी के भरोसे छोड़ कर ऑफिस जाया करते थे। हालांकि उन्होंने नौकरानी के रहने की साड़ी व्यवस्था अपने ही घर में कर दी थी ताकि वो बच्चे को लेकर आराम से घर में रह पाए। नौकरानी का भी व्यवहार ठीक ही था इसलिए वो उसके ऊपर विश्वास करते थे। दिन निकलते गए, सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक एक दिन उनकी बेटी की तबियत ख़राब होने लगी, उसे उल्टियां हो रही थी, उन्होंने सोचा ऐसे ही गैस हुआ होगा शायद इसलिए उलटी कर रही है। पर उन्हें क्या पता था उसकी उल्टियां इतना भयानक दिन उनके जीवन में लाने वाली है।

बिटिया की उल्टियां न रुकी और वो उसे ले कर हॉस्पिटल भागे। सारे टेस्ट किये गए। सिटी स्केन करवाया गया और तब उन्हें पता चला कि उनकी लाडली बस कुछ पलों की मेहमान है। मुझे पूरा यकीन है आप भी उस माता पिता के दर्द को महसूस कर पा रहे हैं।

 

बच्ची के दिमाग़ में चोट लग गई थी, पर कैसे ? ये सवाल उन्हें परेशान कर रहा था, तभी उन्हें सीसी टीवी का ख्याल आया और जब उन्होंने उसमें चेक किया तो उनके होश उड़ गये, नौकरानी ने बच्ची को पटक पटक कर बहोत बुरी तरह से पीटा था जिसके वजह से वो मर गई। नौकरानी को तो कानून ने सजा दे दी पर क्या वो नन्ही परी वापस आ पाई ?

मैंने ये घटना आप को सिर्फ इसलिए सुनाई ताकि आप ये समझ पाएं कि अगर वो बच्ची अपने दादा दादी या चाचा चाची किसी के साथ रहती तो क्या ऐसा होता ?आज का समाज इंडिपेंडेंट रहने के चक्कर में अपने बड़े बूढ़ों और रिश्तेदारों से दूर होता चला जा रहा है। पर आपको नहीं लगता की वो अपनी सुरक्षा को दाव पर लगा रहा है?
इस पर अपने विचार मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर डालें, और रिश्तों को लेकर अपने विचारों को मुझ तक जरूर पहुचायें। ताकि हम ये समझ पाएं कि कैसे हम अपने जीवन को पहचाने । रिश्तों की अहमियत को जाने।

आइये कुछ और कहानियों को पढ़ कर हम अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।

1 thought on “अपने जीवन को पहचाने। रिश्तों की अहमियत को जाने।”

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