“हर उम्र में सुकून के मायने बदल जाते हैं: एक यात्रा ने मुझे क्या सिखाया”

हर उम्र में सुकून के मायने

हर उम्र में सुकून के मायने क्यों बदल जाते हैं? जगन्नाथ पुरी की उस यात्रा पर जाने से पहले मेरे मन में बहुत उत्साह था। मेरे लिए तो समुद्र का किनारा मतलब था—लहरों के पास जाना, पैरों को पानी में भिगोना, दूर तक चलते जाना, तस्वीरें खींचना और खूब सारी यादें बनाना। लेकिन मेरे साथ … Read more

वह रोज़ पूछती थी—“खाना खा लिया?” एक दिन उसने पूछना बंद कर दिया…

माँ की चिंता में छिपा प्यार

माँ की चिंता में छिपा प्यार नमस्ते मेरे प्यारे पाठकों,  कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो अपने प्यार का इज़हार बड़े-बड़े शब्दों में नहीं करते। वे कभी यह नहीं कहते कि “मैं तुम्हारी बहुत चिंता करती हूँ।” वे बस इतना पूछते हैं—“खाना खा लिया?”“इतनी देर क्यों हो गई?”“दवा समय पर ले लेना।”“बाहर जा रहे हो … Read more

आँगन की वो बूढ़ी दादी, जिसकी डाँट में छिपा था प्यार

दादी की डाँट में प्यार

आँगन की वो बूढ़ी दादी की डाँट में प्यार गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू होते ही हमें सबसे ज्यादा इंतजार होता था गाँव जाने का। आज की तरह तब छुट्टियों का मतलब मोबाइल, टीवी और इंटरनेट नहीं हुआ करता था। हमारे लिए गर्मियों की छुट्टियाँ मतलब—गाँव, मिट्टी की खुशबू, खुले आसमान के नीचे सोना, आम के … Read more

माँ की अलमारी में रखा आखिरी खत।

माँ की अलमारी में रखा आखिरी खत

माँ की अलमारी में रखा आखिरी खत। सुबह के सात बज रहे थे। रसोई से अदरक वाली चाय की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी। खिड़की से आती हल्की धूप कमरे के फर्श पर बिखरी हुई थी। बाहर पेड़ों पर चिड़ियाँ चहचहा रही थीं, लेकिन आरव के कमरे में सिर्फ लैपटॉप कीबोर्ड की आवाज़ … Read more

हर बात पर प्रतिक्रिया देना ज़रूरी नहीं है। कभी-कभी चीज़ों को जाने देना भी ज़रूरी होता है।

हर बात पर प्रतिक्रिया देना ज़रूरी नहीं? 7 कारण

हर बात पर प्रतिक्रिया देना ज़रूरी नहीं? 7 कारण आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम हर छोटी-बड़ी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के आदी हो गए हैं। किसी ने कुछ कह दिया, सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी कर दी, परिवार में किसी ने हमारी बात नहीं मानी, या किसी ने हमारी आलोचना कर दी—हम … Read more