“हर उम्र में सुकून के मायने बदल जाते हैं: एक यात्रा ने मुझे क्या सिखाया”

हर उम्र में सुकून के मायने

हर उम्र में सुकून के मायने क्यों बदल जाते हैं? जगन्नाथ पुरी की उस यात्रा पर जाने से पहले मेरे मन में बहुत उत्साह था। मेरे लिए तो समुद्र का किनारा मतलब था—लहरों के पास जाना, पैरों को पानी में भिगोना, दूर तक चलते जाना, तस्वीरें खींचना और खूब सारी यादें बनाना। लेकिन मेरे साथ … Read more

वह रोज़ पूछती थी—“खाना खा लिया?” एक दिन उसने पूछना बंद कर दिया…

माँ की चिंता में छिपा प्यार

माँ की चिंता में छिपा प्यार नमस्ते मेरे प्यारे पाठकों,  कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो अपने प्यार का इज़हार बड़े-बड़े शब्दों में नहीं करते। वे कभी यह नहीं कहते कि “मैं तुम्हारी बहुत चिंता करती हूँ।” वे बस इतना पूछते हैं—“खाना खा लिया?”“इतनी देर क्यों हो गई?”“दवा समय पर ले लेना।”“बाहर जा रहे हो … Read more

आँगन की वो बूढ़ी दादी, जिसकी डाँट में छिपा था प्यार

दादी की डाँट में प्यार

आँगन की वो बूढ़ी दादी की डाँट में प्यार गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू होते ही हमें सबसे ज्यादा इंतजार होता था गाँव जाने का। आज की तरह तब छुट्टियों का मतलब मोबाइल, टीवी और इंटरनेट नहीं हुआ करता था। हमारे लिए गर्मियों की छुट्टियाँ मतलब—गाँव, मिट्टी की खुशबू, खुले आसमान के नीचे सोना, आम के … Read more